
— जो रखेगा आपको हर बीमारी से दूर
भारत में रोटी हमारे खाने का सबसे अहम हिस्सा है। सुबह का नाश्ता, दोपहर का भोजन या रात का डिनर — हर बार थाली में रोटी ज़रूर होती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जो आटा हम रोज़ खाते हैं, वो हमारी सेहत को फायदा पहुँचा रहा है या नुकसान? ज़्यादातर लोग मानते हैं कि गेहूं का आटा सबसे अच्छा होता है, लेकिन हकीकत इससे काफी अलग है।
हाइब्रिड गेहूं का सच
आज के समय में जो गेहूं हम बाजार से खरीदते हैं, वह ज़्यादातर हाइब्रिड फॉर्म का होता है। यानी इसके बीजों को क्रॉस-ब्रीड करके बनाया जाता है। इस प्रक्रिया में कई बार गामा रेज़, एक्स-रे और केमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है ताकि पैदावार ज्यादा हो सके और दाने मोटे बनें। लेकिन इन बदलावों से गेहूं का जेनेटिक स्ट्रक्चर (Genetic Structure) बदल जाता है। यही वजह है कि यह गेहूं पहले जैसा पौष्टिक नहीं रह गया है।
डॉ. सलीम बताते हैं कि ऐसा गेहूं अगर लंबे समय तक खाया जाए, तो यह शरीर पर धीरे-धीरे असर डालता है। मोटापा, डायबिटीज, ब्लड शुगर का बढ़ना, ग्लूटेन एलर्जी, थायराइड और आर्थराइटिस जैसी समस्याएं इसी बदलाव का परिणाम हैं।
हमारे बुज़ुर्ग क्यों रहते थे तंदुरुस्त?
पुराने ज़माने में हमारे दादा-दादी सिर्फ गेहूं नहीं, बल्कि मौसमी अनाज जैसे ज्वार, बाजरा, रागी, जौ आदि भी खाते थे। वे प्राकृतिक, बिना केमिकल वाले अनाज इस्तेमाल करते थे। यही कारण था कि वे 70-80 साल की उम्र में भी फुर्तीले और बीमारियों से दूर रहते थे। आज हम सिर्फ एक ही तरह का आटा (गेहूं) खाते हैं, जिससे शरीर को बाकी जरूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते।
सिर्फ गेहूं का आटा खाने के नुकसान
- वजन तेजी से बढ़ता है
- ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल असंतुलित होते हैं
- ग्लूटेन एलर्जी का खतरा बढ़ता है
- थायराइड और हार्मोनल समस्याएं बढ़ती हैं
- पेट भारी और सुस्ती महसूस होती है
डॉ. सलीम के अनुसार, सिर्फ गेहूं का आटा आपके शरीर को पोषण देने के बजाय धीरे-धीरे कमजोर करता है। लेकिन अगर आप गेहूं के साथ कुछ अन्य अनाज मिला लें, तो यही आटा आपके लिए सुपरफूड बन सकता है।
Dr. सलीम का बताया दुनिया का सबसे बेहतरीन आटा रेसिपी
यह आटा न सिर्फ रोटियों को स्वादिष्ट बनाता है, बल्कि आपकी इम्यूनिटी, पाचन शक्ति और एनर्जी लेवल को भी बढ़ाता है।
आटे में मिलाएं ये 4 सुपर ग्रेन्स:
- चना (Chickpeas)
प्रोटीन और फाइबर का शानदार स्रोत
वजन नियंत्रित रखता है
ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल को संतुलित करता है
खून की कमी (Anemia) को दूर करता है
- जौ (Barley)
किडनी और यूरिनरी ट्रैक्ट के लिए फायदेमंद
बार-बार होने वाले UTI से राहत
शरीर को ठंडक और डिटॉक्स करता है
- रागी (Finger Millet)
कैल्शियम और प्रोटीन से भरपूर
हड्डियों को मजबूत बनाता है
डायबिटीज और मोटापे में मददगार
त्वचा और बालों की सेहत सुधारता है
एंटी-एजिंग गुणों से त्वचा को झुर्रियों से बचाता है
- बाजरा (Pearl Millet)
आयरन से भरपूर, विशेष रूप से महिलाओं के लिए उपयोगी
खून की कमी दूर करता है
शरीर से टॉक्सिन्स निकालता है
पाचन और एनर्जी लेवल बढ़ाता है
आटा बनाने का सही अनुपात (Ratio)
सामग्री अनुपात
गेहूं 10 भाग
चना 2.5 भाग
जौ 2 भाग
रागी 1 भाग
बाजरा 1 भाग
बनाने और स्टोर करने का तरीका
- सभी अनाज को साबुत रूप में लें और अच्छी तरह धोकर धूप में सुखाएं।
- इन्हें अलग-अलग पीसें, क्योंकि हर अनाज का टेक्सचर अलग होता है।
- फिर इन्हें एयरटाइट कंटेनर में रखें।
- जब रोटी बनानी हो, तब बताए गए अनुपात में मिलाकर ताज़ा आटा तैयार करें।
- अगर पहले से मिलाकर रखना चाहें, तो 5–6 दिन से ज़्यादा न रखें, वरना आटे में कीड़े लग सकते हैं।
इस आटे के फायदे
शरीर को सम्पूर्ण पोषण मिलता है
इम्यून सिस्टम मजबूत होता है
पाचन बेहतर होता है
ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल और मोटापा नियंत्रित रहता है
बाल और त्वचा की सेहत सुधरती है
शरीर में थकान और कमजोरी दूर होती है