
महाराष्ट्र के उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत: हाईकोर्ट ने बिजली दरों में बढ़ोतरी पर लगाई रोक, 12 प्रतिशत सस्ता हुआ बिजली बिल
महाराष्ट्र के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर आई है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (महावितरण) द्वारा बिजली दरों में की गई बढ़ोतरी पर रोक लगा दी है। इस फैसले के बाद राज्यभर में बिजली के बिल लगभग 12 प्रतिशत तक सस्ते हो गए हैं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि जब तक नई प्रक्रिया के अनुसार सभी पक्षों की राय नहीं ली जाती, तब तक बढ़ी हुई दरें लागू नहीं होंगी।
मामला क्या है
दरअसल, महाराष्ट्र विद्युत नियामक आयोग (MERC) ने 28 मार्च 2025 को एक आदेश जारी किया था, जिसमें बिजली दरों में संशोधन किया गया था। इस फैसले का असर राज्य वितरण कंपनी यानी MSEDCL (महावितरण) के राजस्व पर अगले 5 वर्षों में करीब 92,000 करोड़ रुपये तक पड़ने की संभावना जताई गई थी। इस निर्णय के बाद महावितरण ने आयोग के समक्ष पुनर्विचार याचिका दायर की थी। आयोग ने याचिका स्वीकार करते हुए 25 जून 2025 को संशोधित आदेश जारी किया और 1 जुलाई से नई दरें लागू कर दीं।
इस संशोधित आदेश के खिलाफ कई औद्योगिक संगठनों और उपभोक्ताओं ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिकाएँ दायर कीं। उन्होंने तर्क दिया कि आयोग ने उपभोक्ताओं से राय लिए बिना ही बिजली दरें बढ़ा दीं, जो कि नियमों के खिलाफ है।
अदालत का बड़ा फैसला
संयुक्त सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाईकोर्ट की खंडपीठ ने उपभोक्ताओं की दलीलों को सही ठहराया। अदालत ने कहा कि विद्युत नियामक आयोग को दरें तय करने से पहले उपभोक्ताओं की राय लेना आवश्यक है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे। इस नियम का पालन न करने पर अदालत ने आयोग के 25 जून के आदेश को रद्द कर दिया।
अब 28 मार्च वाले आदेश के अनुसार ही बिजली दरें लागू रहेंगी, जिसके चलते उपभोक्ताओं के बिलों में करीब 12 प्रतिशत की कमी आएगी। अदालत ने महावितरण को सुप्रीम कोर्ट में अपील करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है।
उपभोक्ताओं के लिए डबल राहत
कोर्ट के इस आदेश से न केवल बिजली दरों में कमी आई है, बल्कि ईंधन अधिभार (Fuel Surcharge) को लेकर भी उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है।
अक्टूबर महीने में उपभोक्ताओं पर 35 से 95 पैसे प्रति यूनिट का ईंधन अधिभार लगाया गया था। इस वजह से बिजली के बिल अचानक बढ़ गए थे। लेकिन अब अगस्त और नवंबर महीनों के लिए इस अधिभार को शून्य करने के आदेश दिए गए हैं।
इसका मतलब यह हुआ कि उपभोक्ताओं को आने वाले महीनों में पहले से काफी कम बिजली बिल चुकाना होगा।
क्यों बढ़ा था बिजली का खर्च
महावितरण की ओर से यह तर्क दिया गया था कि इस साल बिजली की मांग अचानक बढ़ गई थी, जिसके कारण कंपनी को बाहरी स्रोतों से महंगी बिजली खरीदनी पड़ी। इससे उत्पादन लागत बढ़ी और उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डालना पड़ा।
लेकिन हाईकोर्ट के ताजा आदेश ने कंपनी के इस तर्क को नकार दिया है और साफ किया है कि उपभोक्ताओं पर बिना परामर्श के कोई भी वित्तीय बोझ नहीं डाला जा सकता।
क्या होगा आगे?
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद महावितरण को अब सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प दिया गया है। कंपनी अगले चार हफ्तों में शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटा सकती है। हालांकि, जब तक सुप्रीम कोर्ट से कोई नया आदेश नहीं आता, तब तक राज्य में 28 मार्च की दरें ही लागू रहेंगी, यानी उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली मिलती रहेगी।
आम आदमी के लिए राहत की सांस
बिजली बिल में आई यह कमी आम नागरिकों के लिए किसी राहत भरे तोहफे से कम नहीं है। जहां महंगाई लगातार लोगों की जेब पर असर डाल रही है, वहीं बिजली बिल में 12 प्रतिशत की कमी घरों और छोटे कारोबारियों के लिए आर्थिक राहत साबित होगी।