मुंबई: रेलवे कर्मचारियों की हड़ताल के बीच बड़ा हादसा, ट्रैक पर चल रहे 4 यात्रियों को ट्रेन ने मारी टक्कर, 3 की दर्दनाक मौत

मुंबई लोकल में दर्दनाक हादसा: कर्मचारियों की हड़ताल के बीच ट्रेन की चपेट में आए 4 यात्री, तीन की मौत

मुंबई की रफ्तार के नाम से मशहूर लोकल ट्रेनें गुरुवार शाम कुछ देर के लिए थम गईं और इसी रुकावट ने एक दर्दनाक हादसे को जन्म दे दिया। छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) स्टेशन पर रेलवे कर्मचारियों की अचानक हुई हड़ताल के चलते न केवल यात्रियों की मुश्किलें बढ़ीं, बल्कि चार लोगों की जिंदगी भी पटरी पर खत्म हो गई।

दरअसल, गुरुवार शाम करीब 5:50 से 6:45 बजे के बीच रेलवे कर्मचारियों ने काम ठप कर विरोध प्रदर्शन शुरू किया। यह विरोध मुम्ब्रा हादसे में दो इंजीनियरों पर दर्ज हुई एफआईआर के खिलाफ किया गया था। कर्मचारियों का कहना था कि बिना पूरी जांच के इंजीनियरों पर कार्रवाई करना अनुचित है। इस विरोध में नेशनल रेलवे मजदूर यूनियन और सेंट्रल रेलवे मजदूर यूनियन के सदस्य भी शामिल थे।

इस एक घंटे की हड़ताल का असर इतना गहरा था कि मुंबई की सबसे व्यस्त लोकल सेवाएं पूरी तरह ठप हो गईं। सीएसएमटी स्टेशन पर हजारों यात्री फंस गए, प्लेटफॉर्म पर भीड़ उमड़ पड़ी, और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। ट्रेनें न चलने के कारण कुछ यात्री परेशान होकर ट्रैक के किनारे-किनारे पैदल आगे बढ़ने लगे — शायद इस उम्मीद में कि किसी अगले स्टेशन से उन्हें ट्रेन मिल जाएगी या वे अपने घर पहुंच जाएंगे।

इसी बीच, सैंडहर्स्ट रोड स्टेशन के पास एक तेज रफ्तार ट्रेन चार यात्रियों को टक्कर मारती चली गई। हादसा इतना भयानक था कि मौके पर ही तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि चौथा व्यक्ति गंभीर रूप से घायल है और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, अंधेरा और भीड़भाड़ के बीच ट्रेन के आने का अंदाजा लगाना मुश्किल था, जिसकी वजह से यह टक्कर हुई।

हादसे के बाद स्टेशन पर मौजूद यात्रियों में हड़कंप मच गया। रेलवे पुलिस और अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। हादसे की खबर जैसे ही फैली, पूरे मुंबई में रोष और दुख की लहर दौड़ गई।

बताया जा रहा है कि यह पूरा विवाद जून में हुए मुम्ब्रा ट्रेन हादसे से जुड़ा है। उस हादसे में पांच लोगों की मौत हुई थी और जांच में पता चला था कि ट्रैक की मरम्मत के दौरान वेल्डिंग का काम सही तरीके से नहीं हुआ था। इसी लापरवाही के चलते ट्रैक टूटा और दुर्घटना हुई। रिपोर्ट आने के बाद रेलवे प्रशासन ने दो इंजीनियरों पर एफआईआर दर्ज की थी। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें बलि का बकरा बनाया जा रहा है, जबकि असली गलती सिस्टम की है।

मुम्ब्रा हादसे के विरोध में की गई इस हड़ताल ने एक और हादसे को जन्म दे दिया, जिसने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं।

स्थानीय यात्रियों और सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर ऐसी हड़तालें बिना किसी सुरक्षा इंतजाम के कैसे हो सकती हैं। अगर ट्रैक पर चलने वाले यात्रियों की सुरक्षा के लिए समय रहते व्यवस्था की जाती, तो शायद ये जिंदगियां बचाई जा सकती थीं।

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