
बिलासपुर ट्रेन हादसा: आखिर कैसे टकराईं दो ट्रेनें एक ही ट्रैक पर? लोको पायलट की गलती या सिग्नलिंग सिस्टम की चूक?
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में सोमवार की शाम एक दिल दहला देने वाला रेल हादसा हुआ, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। गेवरा से बिलासपुर आ रही एक पैसेंजर ट्रेन गतौरा और बिलासपुर के बीच मालगाड़ी से जा टकराई। हादसा शाम करीब चार बजे लाल खदान इलाके में हुआ, जब दोनों ट्रेनें किसी तकनीकी गड़बड़ी के चलते एक ही ट्रैक पर आ गईं। टक्कर इतनी भीषण थी कि पैसेंजर ट्रेन का पहला डिब्बा — जो किचन कोच होता है — पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। कई यात्रियों के घायल होने और कुछ की मौत की आशंका जताई जा रही है।
जैसे ही हादसे की सूचना मिली, रेलवे और जिला प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे। राहत और बचाव कार्य तुरंत शुरू किया गया। स्थानीय लोगों ने भी रेस्क्यू टीम के साथ मिलकर यात्रियों को बाहर निकालने में मदद की। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक तरुण प्रकाश और बिलासपुर के डीआरएम राजमल खोईवाल खुद घटनास्थल पर पहुंचे और राहत कार्यों की निगरानी की। रेलवे ने तत्काल मेडिकल टीम और रेस्क्यू ट्रेन रवाना की।
कैसे हुई इतनी बड़ी चूक?
हादसे के बाद अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर दो ट्रेनें एक ही ट्रैक पर कैसे आ गईं?
रेलवे सूत्रों के अनुसार, यह दुर्घटना अप लाइन पर हुई, जब ट्रेन नंबर 68733 गेवरा रोड से बिलासपुर की ओर बढ़ रही थी। उसी समय, बिलासपुर से एक मालगाड़ी उसी ट्रैक पर आ गई। लोको पायलट ने ब्रेक लगाने की कोशिश की, लेकिन दूरी बहुत कम थी, इसलिए टक्कर हो गई।
प्रारंभिक जांच में दो प्रमुख कारण सामने आ रहे हैं —
- सिग्नलिंग सिस्टम की विफलता: संभावना है कि किसी तकनीकी खामी के कारण ट्रैक का सिग्नल गलत हो गया, जिससे दोनों ट्रेनों को एक ही लाइन पर आने की अनुमति मिल गई।
- मानव त्रुटि: कुछ अधिकारियों का कहना है कि लोको पायलट को ट्रैक पर खड़ी मालगाड़ी नजर आई थी, फिर भी ट्रेन को समय पर नहीं रोका गया।
रेलवे ने मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। जांच टीम यह पता लगाएगी कि गलती सिग्नलिंग सिस्टम में थी या ट्रेन ऑपरेशन में मानवीय चूक हुई।
बचाव कार्य जारी, घायल अस्पताल में भर्ती
घटना के तुरंत बाद यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। कई लोग ट्रेन के डिब्बों में फंस गए थे। बचाव दल ने गैस कटर की मदद से कोच काटकर फंसे यात्रियों को बाहर निकाला। घायलों को बिलासपुर और आसपास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों की टीमें लगातार इलाज में जुटी हैं।
स्थानीय लोगों ने बताया कि टक्कर की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास के गांवों तक सुनाई दी। हादसे के तुरंत बाद ग्रामीण घटनास्थल की ओर दौड़े और रेस्क्यू कार्य में मदद की।
रेल यातायात प्रभावित, ट्रेनों को डायवर्ट किया गया
हादसे के कारण कुछ घंटे तक अप लाइन पर रेल संचालन ठप रहा। रेलवे ने स्थिति संभालते हुए अन्य ट्रेनों को वैकल्पिक मार्गों से डायवर्ट किया। बिलासपुर रेलवे स्टेशन पर एक अतिरिक्त कंट्रोल रूम बनाया गया है ताकि यात्रियों और उनके परिजनों को सही जानकारी मिल सके।
रेलवे ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने यात्रियों और उनके परिजनों की सुविधा के लिए आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं —
- बिलासपुर: 7777857335, 7869953330
- चांपा: 8085956528
- रायगढ़: 9752485600
- पेंड्रा रोड: 8294730162
- कोरबा: 7869953330
इन नंबरों पर कॉल कर यात्री हादसे से जुड़ी जानकारी ले सकते हैं।
क्या कहते हैं रेलवे अधिकारी
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि गलती कहां हुई। तकनीकी गड़बड़ी की भी जांच की जा रही है और लोको पायलट से भी पूछताछ की जाएगी।
रेलवे मंत्रालय ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है और सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं।
यात्रियों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
यह हादसा भारतीय रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा करता है। आए दिन किसी न किसी राज्य से ट्रेन दुर्घटनाओं की खबरें आती हैं, जिनका कारण ज्यादातर सिग्नलिंग फेल्योर, तकनीकी खराबी या मानव त्रुटि होता है।
रेलवे विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम और ऑटोमैटिक ट्रेन कंट्रोल सिस्टम (ATCS) को तेजी से लागू करने की जरूरत है।
लोगों की आंखों में आंसू, मदद को आगे आए स्थानीय
घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने बताया कि हादसे के बाद दृश्य बेहद भयावह था। कई यात्री घायल अवस्था में चीख रहे थे, कुछ अपने परिजनों को खोज रहे थे। स्थानीय युवाओं ने फायर ब्रिगेड और मेडिकल टीम के साथ मिलकर राहत कार्य में अहम भूमिका निभाई।