बेंगलुरु में बिना ड्राइवर की कार का कमाल! कॉलेज कैंपस में ‘संत बाबा’ की अनोखी सवारी, वीडियो हुआ वायरल

बेंगलुरु में बिना ड्राइवर की कार का कमाल! संत ने कॉलेज कैंपस में की सवारी, वीडियो हुआ वायरल

बेंगलुरु से एक ऐसा वीडियो सामने आया है जिसने सोशल मीडिया पर लोगों की जिज्ञासा को चरम पर पहुंचा दिया है। वीडियो में उत्तरादि मठ के सत्यात्मातीर्थ स्वामीजी एक बिना ड्राइवर वाली कार में बैठे दिखाई दे रहे हैं, और यह कार कॉलेज कैंपस में खुद ब खुद चल रही है। यह दृश्य देखने वालों को किसी विज्ञान-फिक्शन फिल्म जैसा अहसास दे रहा है।

सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके इस वीडियो ने लोगों के मन में कई सवाल खड़े कर दिए — क्या यह सच में ड्राइवरलेस कार है? इसे किसने बनाया? और आखिर यह तकनीक भारत में कब तक आम लोगों तक पहुंचेगी?

दरअसल, यह वीडियो बेंगलुरु के आरवी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (RV College of Engineering) का है। सत्यात्मातीर्थ स्वामीजी वहां दौरे पर गए थे, जहां उन्होंने इस कार में बैठकर एक छोटी सी सवारी की। यह कोई तैयार प्रोडक्शन मॉडल नहीं, बल्कि अभी विकास के चरण में चल रही एक ड्राइवरलेस कार प्रोटोटाइप है, जिस पर देश के शीर्ष इंजीनियर और वैज्ञानिक काम कर रहे हैं।

कौन बना रहा है यह कार?

यह ड्राइवरलेस कार परियोजना भारत की तीन प्रमुख संस्थाओं — विप्रो (Wipro), भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) और आरवी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग — की साझेदारी में विकसित की जा रही है।
इन तीनों ने मिलकर WIRIN (Wipro–IISc Research and Innovation Network) नाम से एक शोध मंच तैयार किया है, जिसका लक्ष्य है — भविष्य की तकनीकों को भारतीय ज़रूरतों के मुताबिक विकसित करना।

WIRIN का मकसद केवल प्रयोगशाला तक सीमित शोध करना नहीं, बल्कि ऐसी रियल-वर्ल्ड इनोवेशन तैयार करना है जो समाज के काम आए — जैसे कि स्मार्ट वाहन, AI सिस्टम, और ह्यूमन-रोबोट इंटरेक्शन टेक्नोलॉजी।

ड्राइवरलेस कार की तकनीक कैसे काम करती है?

यह कार पूरी तरह से सेंसर, कैमरा, रडार और AI एल्गोरिद्म पर आधारित है।

कैमरे और सेंसर आसपास के माहौल का 3D मॉडल तैयार करते हैं।

कंप्यूटर विज़न सिस्टम सड़क, ट्रैफिक सिग्नल और पैदल यात्रियों को पहचानता है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यह तय करता है कि कब मोड़ना है, कब ब्रेक लगाना है, और किस रास्ते से जाना है।

कार का “ब्रेन” यानी उसका कंट्रोल सिस्टम, हर सेकंड लाखों डेटा पॉइंट्स का विश्लेषण करता है और तुरंत निर्णय लेता है।

टीम ने बताया है कि फिलहाल यह कार सीमित स्पीड पर और नियंत्रित माहौल में ही चलाई जा रही है, ताकि सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। आने वाले महीनों में इसे और अधिक जटिल भारतीय सड़कों पर टेस्ट करने की योजना है।

भारत की सड़कों के लिए खास तैयारी

भारत में ट्रैफिक का ढांचा, सड़कें और ड्राइविंग पैटर्न पश्चिमी देशों से काफी अलग हैं। यही वजह है कि टीम ने इस तकनीक को भारतीय सड़कों के हिसाब से ढालने के लिए डिटेल्ड रोड मैपिंग और ट्रैफिक डेटा एनालिसिस शुरू किया है।

इस प्रक्रिया में हजारों किलोमीटर की सड़कों का डेटा एकत्र किया जा रहा है —

  • लेन की चौड़ाई,
  • मोड़ का कोण,
  • सिग्नल पैटर्न,
  • पैदल यात्री की गतिविधियां,
  • और मौसम के प्रभाव।

यह सभी जानकारियां AI मॉडल को “भारत-जैसे माहौल” में सोचने और निर्णय लेने में सक्षम बनाती हैं।

AI, रोबोटिक्स और ह्यूमन-मशीन इंटरैक्शन का संगम

WIRIN प्लेटफॉर्म केवल वाहन तकनीक तक सीमित नहीं है। इसके अन्य शोध क्षेत्र भी उतने ही रोमांचक हैं:

ऑटोनॉमस सिस्टम – जिसमें कंप्यूटर विजन और इमेज प्रोसेसिंग की मदद से मशीनें खुद निर्णय ले सकती हैं।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग – डीप लर्निंग एल्गोरिद्म के जरिए सिस्टम को लगातार “सीखने” की क्षमता दी जा रही है।

डेटा साइंस और साइबर सुरक्षा – ताकि इन वाहनों से जुड़ा हर डेटा सुरक्षित रहे।

स्मार्ट मटेरियल्स और इमेजिंग टेक्नोलॉजी – जिससे वाहन और भी हल्के, टिकाऊ और बुद्धिमान बन सकें।

डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग – ताकि भविष्य में यह तकनीक बड़े पैमाने पर भारतीय बाजार के अनुकूल बनाई जा सके।

संतों का विज्ञान के प्रति समर्थन

स्वामी सत्यात्मातीर्थ जी का इस तरह के आधुनिक प्रोजेक्ट में शामिल होना भी प्रतीक है कि आध्यात्मिकता और विज्ञान अब साथ-साथ चल रहे हैं।
उन्होंने छात्रों और वैज्ञानिकों की टीम की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारत के युवाओं में अपार क्षमता है और अगर उन्हें सही दिशा और संसाधन मिले, तो वे दुनिया को नई दिशा दे सकते हैं।

उनकी यह सवारी प्रतीक है “नवाचार और संस्कृति के संगम” की — जहां परंपरा और तकनीक मिलकर एक नए भारत की तस्वीर बना रहे हैं।

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