“महाराष्ट्र के किसानों को बड़ी सौगात! फडणवीस सरकार 2026 तक करेगी कर्ज माफ, पूरा होगा चुनावी वादा”

फडणवीस सरकार का बड़ा ऐलान: 2026 तक महाराष्ट्र के किसानों का कर्ज होगा माफ, आंदोलन के बीच दी बड़ी राहत

महाराष्ट्र के किसानों के लिए एक बड़ी खुशखबरी आई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ऐलान किया है कि उनकी सरकार 30 जून 2026 तक राज्य के सभी पात्र किसानों का कर्ज माफ करेगी। यह फैसला न केवल राज्य की राजनीति में बल्कि लाखों किसानों के जीवन में भी नई उम्मीद जगाने वाला है।
फडणवीस ने कहा कि उनकी पार्टी ने विधानसभा चुनाव के दौरान किसानों से पूर्ण कर्ज माफी का वादा किया था और अब वह वादा पूरा करने की दिशा में ठोस कदम उठाया जा रहा है।

किसानों के लिए बनी विशेष समिति

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने इसके लिए एक विशेष समिति का गठन किया है, जो कर्ज माफी की रूपरेखा तैयार कर रही है। समिति जल्द ही अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी, जिसके आधार पर कर्ज माफी की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
फडणवीस ने कहा कि सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कर्ज माफी का लाभ उन किसानों तक पहुंचे जो वास्तव में आर्थिक रूप से कमजोर हैं और जो लगातार मौसम की मार, फसल खराबी और बाजार के उतार-चढ़ाव से जूझ रहे हैं।

किसानों के आंदोलन का दबाव

पिछले कुछ दिनों से महाराष्ट्र में किसानों के बीच कर्ज माफी को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज़ हो गया था।
प्रहार जनशक्ति पार्टी के नेता बच्चू कडू इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने ट्रैक्टर मार्च निकालते हुए किसानों की आवाज़ को राजधानी तक पहुंचाने की ठानी थी।
उनका यह मार्च चंदूर बाजार से शुरू होकर वर्धा होते हुए नागपुर तक पहुंचा। इस आंदोलन में हजारों किसान शामिल हुए जिन्होंने सरकार से “पूर्ण ऋण माफी” की मांग की।

फडणवीस ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विरोध के बजाय संवाद के ज़रिए हल निकाला जा सकता है। उन्होंने किसान नेताओं से अपील की कि वे मुंबई आकर सरकार से चर्चा करें, ताकि स्थायी समाधान निकाला जा सके।

बैठक में शामिल हुए शिंदे और पवार

मुख्यमंत्री फडणवीस ने बताया कि इस मामले पर हुई उच्चस्तरीय बैठक में दोनों उपमुख्यमंत्री — एकनाथ शिंदे और अजित पवार — भी मौजूद थे।
उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य किसानों को राहत देना है, न कि राजनीति करना। मैंने सभी से आग्रह किया है कि कोई भी अड़ियल रुख न अपनाए। हमें किसानों के भविष्य की चिंता करनी चाहिए।”

सरकार की इस गंभीरता से साफ है कि आने वाले महीनों में महाराष्ट्र के किसानों के लिए कर्ज माफी योजना का विस्तृत खाका सामने आ सकता है, जिससे लाखों किसानों को आर्थिक राहत मिलेगी।

बच्चू कडू की प्रतिक्रिया

इस बीच, किसान नेता बच्चू कडू ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सरकार किसानों के पक्ष में निर्णय लेगी।
उन्होंने कहा, “हमारा एकमात्र उद्देश्य गरीब किसानों की पूर्ण कर्ज माफी है। आधी-अधूरी राहत से किसान का जीवन नहीं बदल सकता। हमें उम्मीद है कि मुख्यमंत्री आज कुछ ठोस घोषणा करेंगे।”

कडू ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन राजनीतिक नहीं है, बल्कि किसानों की आवाज़ को सरकार तक पहुँचाने का प्रयास है।

महाराष्ट्र के किसान: कर्ज के बोझ तले दबे

यह सर्वविदित है कि महाराष्ट्र के किसान लंबे समय से कर्ज के बोझ तले दबे हुए हैं।
कभी सूखा, कभी असमय बारिश, तो कभी फसल का उचित मूल्य न मिलना — इन सभी कारणों ने किसानों की आर्थिक स्थिति को बेहद कमजोर कर दिया है।
राज्य के कई हिस्सों में किसानों को अपनी जमीन और पशुधन तक गिरवी रखना पड़ा है। ऐसे में कर्ज माफी की यह घोषणा उनके लिए नई सुबह की तरह है।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार पारदर्शी तरीके से कर्ज माफी लागू करती है, तो इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई ऊर्जा आएगी और किसान फिर से खेती की ओर लौटने का साहस जुटा पाएंगे।

बंधक संकट पर भी बोले फडणवीस

राज्य की राजनीति के बीच मुख्यमंत्री ने मुंबई पवई में हुए बंधक कांड पर भी प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा कि मुंबई पुलिस ने “सटीक और साहसिक अभियान” चलाकर 17 बच्चों को सुरक्षित छुड़ाया, यह सराहनीय है।
मुख्यमंत्री ने पूरी कार्रवाई की प्रशंसा करते हुए कहा कि “हमारी पुलिस ने दिखा दिया है कि जब बात जनता की सुरक्षा की हो, तो महाराष्ट्र पीछे नहीं हटता।”

गौरतलब है कि इस घटना में रोहित आर्य नामक व्यक्ति ने 17 बच्चों को बंधक बना लिया था, जिसके बाद पुलिस की विशेष टीम ने कार्रवाई करते हुए बच्चों को सुरक्षित बचाया।
संघर्ष के दौरान रोहित आर्य गंभीर रूप से घायल हो गया और बाद में अस्पताल में उसकी मौत हो गई।

किसानों और सुरक्षा दोनों पर फोकस

एक ओर जहां सरकार किसानों के हित में बड़े फैसले ले रही है, वहीं दूसरी ओर कानून-व्यवस्था पर भी मुख्यमंत्री की नजर बनी हुई है।
फडणवीस ने कहा, “हमारी प्राथमिकता दो हैं — किसान और जनता की सुरक्षा। सरकार न तो किसानों को निराश करेगी और न ही राज्य की शांति भंग होने देगी।”

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