
देव दीपावली पर आसमान में दिखेगा अद्भुत नज़ारा – आज रात चमकेगा साल का सबसे बड़ा “सुपरमून”
नेशनल डेस्क:
कार्तिक पूर्णिमा और देव दीपावली का पावन पर्व इस बार एक खगोलीय चमत्कार का साक्षी बनने जा रहा है। बुधवार, 5 नवंबर 2025 की रात का आसमान कुछ ऐसा दृश्य दिखाने वाला है, जो हर किसी को मंत्रमुग्ध कर देगा। आज की रात धरती के सबसे करीब आने वाला चांद यानी “सुपरमून” दिखाई देगा। यह सिर्फ खगोल विज्ञान का नहीं, बल्कि धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी बेहद शुभ संयोग है, क्योंकि आज देव दीपावली भी है — वह दिन जब काशी में देवता स्वयं दीप जलाते हैं और पूरी धरती प्रकाश से नहा उठती है।
क्या है सुपरमून का रहस्य?
“सुपरमून” शब्द सुनने में भले ही वैज्ञानिक लगे, पर इसका अर्थ बेहद सरल है। जब पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अपने परिक्रमण पथ (Orbit) में पृथ्वी के सबसे करीब आता है, तब वह सामान्य से अधिक बड़ा और ज्यादा चमकीला दिखाई देता है। आमतौर पर यह अंतर नग्न आंखों से भी साफ नजर आता है।
खगोल वैज्ञानिकों के अनुसार, आज का सुपरमून साधारण पूर्णिमा के चांद से करीब 6 से 7 प्रतिशत बड़ा और लगभग 25 से 30 प्रतिशत ज्यादा उज्जवल होगा। यानी जब आप आज रात आसमान की ओर देखेंगे, तो चांद आपको पहले से कहीं ज्यादा निकट, विशाल और चांदी की तरह चमकता हुआ दिखाई देगा।
देव दीपावली पर सुपरमून का दुर्लभ संयोग
इस बार की देव दीपावली इसलिए भी खास है क्योंकि इसे सजाने आया है ये अद्भुत सुपरमून। वाराणसी, हरिद्वार, उज्जैन जैसे धार्मिक नगरों में जब लाखों दीप जलेंगे, तब आसमान में यह चमकता चांद उस नज़ारे को और दिव्य बना देगा।
गंगा घाटों पर आज रात का दृश्य ऐसा होगा मानो आकाश और धरती दोनों मिलकर दीपों की आरती उतार रहे हों। वैज्ञानिक दृष्टि से यह एक खगोलीय घटना है, लेकिन आध्यात्मिक रूप से यह लोगों के लिए प्रकाश, ऊर्जा और नवजीवन का प्रतीक मानी जा रही है।
कब और कहां दिखेगा सुपरमून?
दिल्ली और उत्तर भारत के अधिकतर इलाकों में आज रात 7:30 बजे के बाद पूर्व दिशा में चंद्रमा का उदय होगा। आसमान साफ़ रहा तो यह सुपरमून बहुत स्पष्ट और चमकदार दिखाई देगा।
दिल्ली, लखनऊ, जयपुर में चांद लगभग 7:30 से 7:40 के बीच निकलेगा।
मुंबई और पुणे में यह करीब 7:50 बजे के आसपास दिखाई देगा।
कोलकाता में यह थोड़ा पहले, यानी 7:15 बजे नजर आएगा।
दक्षिण भारत में चेन्नई और बेंगलुरु के आसमान में यह दृश्य 7:45 बजे के बाद देखा जा सकेगा।
अगर आपके इलाके में हल्के बादल हों तो भी चिंता की बात नहीं—चांद की चमक इतनी प्रबल होगी कि वह बादलों को चीरकर भी झलक दिखा देगा।
अगला सुपरमून कब दिखाई देगा?
अगर आप आज का सुपरमून देखने से चूक गए तो अगला मौका 4 दिसंबर 2025 को मिलेगा, लेकिन खगोलविदों का कहना है कि दिसंबर वाला सुपरमून आज जितना बड़ा या चमकीला नहीं होगा। इसके बाद हमें 2026 के नवंबर तक इंतज़ार करना पड़ेगा। यानी आज की रात एक वर्ष में एक बार मिलने वाला खगोलीय तोहफ़ा है।
कैसे करें सुपरमून का आनंद
- खुले आसमान वाली जगह चुनें – जैसे किसी छत, पार्क या नदी किनारे।
- लाइट्स बंद करें या कम करें, ताकि चांद की रोशनी साफ दिखाई दे।
- बाइनाक्युलर या कैमरा साथ रखें, क्योंकि इस बार आप चांद की सतह पर गड्ढे और रेखाएँ भी साफ़ देख सकेंगे।
- बच्चों को यह दिखाना न भूलें — उनके लिए यह एक शानदार खगोलीय अनुभव होगा।
- अगर आप पूजा या ध्यान करते हैं, तो यह रात मानसिक शांति और ऊर्जा प्राप्त करने के लिए भी श्रेष्ठ मानी जाती है।
देव दीपावली की आस्था और चांद की आभा
कहा जाता है कि देव दीपावली की रात जब चांद अपनी पूरी कलाओं में खिलता है, तो देवता स्वयं गंगा में स्नान कर दीप प्रज्वलित करते हैं। इस वर्ष सुपरमून के कारण गंगा की लहरें और भी उज्ज्वल दिखाई देंगी।
वाराणसी में करीब 15 लाख दीपक जलाने की तैयारी की गई है। जब घाटों पर दीपों की कतारें और ऊपर आसमान में विशाल सुपरमून एक साथ चमकेंगे, तो दृश्य किसी स्वप्नलोक से कम नहीं होगा।
वैज्ञानिकों और ज्योतिषाचार्यों की राय
खगोलविदों के अनुसार सुपरमून का हमारे जीवन पर कोई नकारात्मक असर नहीं होता। यह सिर्फ एक प्राकृतिक घटना है जो पृथ्वी और चंद्रमा की दूरी पर निर्भर करती है।
वहीं ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि देव दीपावली की रात सुपरमून का दिखना आध्यात्मिक उन्नति और सकारात्मक ऊर्जा का संकेत है। इस रात की चांदनी में स्नान या ध्यान करने से मन की अशुद्धियाँ दूर होती हैं और जीवन में शांति का अनुभव होता है।