
जयपुर हादसा: नीरजा मोदी स्कूल की छत से गिरी 6वीं की छात्रा, मौके पर ही गई जान — पूरे शहर में छाया मातम
राजस्थान की राजधानी जयपुर से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। शहर के प्रतिष्ठित निजी स्कूल नीरजा मोदी स्कूल में शुक्रवार को उस वक्त अफरा-तफरी मच गई जब 6वीं कक्षा में पढ़ने वाली 12 वर्षीय छात्रा अमायरा स्कूल की इमारत से नीचे गिर गई। यह हादसा इतना भयावह था कि मौके पर मौजूद लोगों के रोंगटे खड़े हो गए। बच्ची को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद से पूरे स्कूल प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है, वहीं छात्र-छात्राओं और अभिभावकों के बीच भी गहरी चिंता और गुस्सा है।
कैसे हुआ दर्दनाक हादसा
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह घटना स्कूल की छत या ऊपरी मंजिल से हुई बताई जा रही है। जयपुर के मानसरोवर इलाके में स्थित नीरजा मोदी स्कूल एक दस मंजिला इमारत है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि अमायरा स्कूल की छत के पास गई थी, लेकिन अब तक यह साफ नहीं हो पाया है कि वह वहां कैसे पहुंची और गिरने की असली वजह क्या थी।
कुछ प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि बच्ची स्कूल की सीढ़ियों की तरफ गई थी, तभी अचानक नीचे गिरने की आवाज सुनाई दी। जब स्कूल स्टाफ वहां पहुंचा तो देखा कि बच्ची झाड़ियों में गिरी पड़ी थी और सिर से खून बह रहा था। स्टाफ ने फौरन उसे उठाया और मेट्रो मास अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।
सीसीटीवी से मिलेंगे जवाब
इस दर्दनाक हादसे के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर पूरे स्कूल परिसर को सील कर दिया। एफएसएल (Forensic Science Laboratory) की टीम को भी बुलाया गया है ताकि तकनीकी सबूत जुटाए जा सकें।
पुलिस का कहना है कि स्कूल की हर मंजिल और सीढ़ियों पर सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं, और उन फुटेज की बारीकी से जांच की जा रही है।
जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि बच्ची अकेली ऊपर गई थी या उसके साथ कोई और छात्र या कर्मचारी भी मौजूद था।
साथ ही, यह भी देखा जा रहा है कि क्या स्कूल की छत या ऊपरी मंजिलों पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम थे या नहीं।
शिक्षा मंत्री ने जताया दुख, दिए जांच के आदेश
राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि “एक मासूम बच्ची की मौत बेहद दुखद और चिंताजनक है। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि ऐसी लापरवाही दोबारा न हो।”
मंत्री ने प्रशासन को आदेश दिया है कि पूरा मामला उच्च स्तरीय जांच के तहत लाया जाए और अगर स्कूल प्रशासन की कोई गलती पाई जाती है, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
इसके साथ ही शिक्षा विभाग ने सभी निजी स्कूलों को भी चेतावनी दी है कि वे अपने परिसर की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करें, ताकि बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता न हो।
अभिभावकों में आक्रोश और सवालों की बौछार
घटना के बाद से अभिभावकों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। कई लोगों का कहना है कि इतने बड़े और नामी स्कूल में बच्चों की सुरक्षा को लेकर इतनी बड़ी चूक अस्वीकार्य है।
कई अभिभावकों ने सवाल उठाया कि जब स्कूल की इमारत दस मंजिला है, तो छत या ऊपरी मंजिलों पर सुरक्षा ग्रिल या बैरियर क्यों नहीं लगाए गए?
वहीं कुछ लोगों का कहना है कि स्कूल को यह स्पष्ट करना चाहिए कि छात्रा वहां अकेली क्यों गई थी और उस समय स्टाफ कहां था।
पुलिस कर रही है हर एंगल से जांच
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
ACP और SHO मानसरोवर थाने की टीम स्कूल में लगातार जांच कर रही है।
पुलिस ने बताया कि अमायरा एक उज्ज्वल और अनुशासित छात्रा थी, और उसके परिजनों को इस हादसे की खबर मिलते ही स्कूल पहुंचाया गया। परिवार इस दर्द से टूट चुका है और रो-रोकर बुरा हाल है।
एफएसएल रिपोर्ट और सीसीटीवी फुटेज से साफ हो जाएगा कि यह दुर्घटना थी, किसी की लापरवाही का नतीजा या फिर कोई और वजह।
बच्चों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल
यह घटना न केवल जयपुर बल्कि पूरे देश के अभिभावकों को झकझोर देने वाली है।
जब एक नामी निजी स्कूल में ऐसा हादसा हो सकता है, तो छोटे स्कूलों में सुरक्षा की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूल प्रशासन को सिर्फ पढ़ाई पर नहीं बल्कि सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य पर भी ध्यान देना चाहिए।
हर स्कूल में बच्चों की मूवमेंट मॉनिटर करने, खतरनाक क्षेत्रों में प्रवेश रोकने और काउंसलिंग की व्यवस्था जरूरी है।